नमस्कार दोस्तों, आप सभी जानते हैं कि लालू यादव बिहार की राजनीति के पुराने और प्रभावशाली खिलाड़ी हैं। उन्होंने न केवल अपनी पार्टी को मजबूती दी, बल्कि अपनी पत्नी राबड़ी देवी को भी मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया। लालू यादव ने हमेशा बिहार की राजनीति को अपनी शर्तों पर प्रभावित किया। हालांकि, अब जब उन्होंने राजनीति में अपने बेटों को जिम्मेदारी दी है और खुद रिटायरमेंट ले लिया है, तब भी उनके बयानों से राजनीति में हलचल मच जाती है। हाल ही में एक बयान के कारण उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव को भी मीडिया में सवालों का सामना करना पड़ा।
लालू जी ने हाल ही में एक बयान दिया जिसमें उन्होंने महागठबंधन के दरवाजे नितीश कुमार के लिए खुले होने की बात की। उनका यह बयान एक तरह से राजनीतिक माहौल में नई बहस का कारण बन गया। बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “क्या कह रहे हैं, छोड़िए।” यह बयान दरअसल नितीश कुमार की तरफ से लालू यादव के बयान को टालने और अनदेखा करने का संकेत था। उन्होंने मीडिया से इस सवाल को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया।
लालू यादव के इस बयान पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लालू यादव को न केवल नीतीश कुमार से डर लगता है, बल्कि उन्हें यह भी भली-भांति पता है कि नीतीश कुमार को यह सब मालूम है कि लालू यादव ने बिहार में किस तरह से भ्रष्टाचार और लूट-खसोट की है। सम्राट चौधरी का कहना था कि लालू अब भाजपा गठबंधन (NDA) से डरते हैं और इसी कारण वह महागठबंधन की ओर इशारा कर रहे हैं।
वहीं, जेडीयू के एक मंत्री ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि उनकी पार्टी NDA में है और वह यहीं बने रहेंगे। उनका स्पष्ट रूप से यह कहना था कि जेडीयू का रुख अभी भी NDA के साथ है और कोई भी बयान इस स्थिति को बदलने वाला नहीं है।
अब, लालू यादव के बयान पर उनके बेटे तेजस्वी यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। तेजस्वी का कहना था कि उनके पिता ने मीडिया का मुँह बंद करने के लिए यह बयान दिया था। उनका यह बयान पूरी तरह से राजनीतिक माहौल को ध्यान में रखते हुए था, ताकि मीडिया की तरफ से कोई और सवाल न उठे।
निष्कर्ष
इस पूरे घटनाक्रम में यह साफ हो जाता है कि बिहार की राजनीति में अभी भी लालू यादव का प्रभाव है, लेकिन उनके बयानों के कारण पार्टी के भीतर और बाहर कई मतभेद और उलझनें पैदा हो रही हैं। तेजस्वी यादव और नितीश कुमार के बीच रिश्तों की स्थिति भी अब पूरी तरह से साफ नहीं है। साथ ही, जेडीयू और NDA के बीच का गठबंधन भी मजबूत बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कौन सा मोड़ आता है और लालू यादव का प्रभाव किस तरह से बना रहता है।